ओम साईं राम
रूक जाना नहीं
तू कहीं हार के
चाहे उबड खाबड हैं
रस्ते साईं द्वार के
वो परवरदिगार साईं पिता
बडा ही दयालु है
सागर जैसा उसका दिल है
वो तो परम कृपालु है
थामेगा गिरने नहीं देगा
पूर्ण विशवास है मेरा
आप ही राह दिखाएगा
भला करेगा तेरा
जय साईं राम
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/हमारी-मांगें-पूरी-करो-t20105.45.html
January 18, 2008, 10:22:50 AM