ओम साईं राम
आज द्वारकामाई में आकर
मेरी आंखे भर आई
इतनी प्यारी दुआंओ के लिए शुक्रिया
अनु बहन रमेश भाई
शुक्रिया है साईंनाथ का
जिन्होंने ये मंदिर बनाया
भक्ति के फूलों को चुनकर
इसमें आन सजाया
बाबा ने प्यारे भक्तों की
एक जमात बनाई
देख देख उनको मुस्काते
साईं सर्व सहाई
जब जब भक्त यहां पर आकर
याद तुम्हें करते हैं
आनंदित हो सारी खुशियां
झोली में भरते हैं
जिसकी जो भी व्यथा हो साईं
यहां आकर कहता है
निर्मल भक्ति का पावन झरना
यहीं कहीं बहता है
कितने ही भक्तों की झोली
तुमने यहां भरी है
कितनों के मन की मुरादें
तुमने पूर्ण करी हैं
मुझको अब ये प्यारा मंदिर
शिरडी सा लगता है
इसके इक इक भक्त हृदय में
साईं नाथ बसता है
जय साईं राम
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January 18, 2008, 10:18:53 AM