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आज द्वारकामाई में जब सुरेखा दीदी आई,

ॐ साईं राम~~~

आज द्वारकामाई में जब सुरेखा दीदी आई,
आते ही दुवाएँ पाकर आँखे उनकी भर आई,
हमारी दुवाओं मे तो बाबा का प्यार बसा है,
इतना प्यारा सुरेखा नाम का फूल हमारे लिए साईं ने खुद चुना है~~
       
मेरे सर्व सहाई की इस मुस्कान के सदके,
इस सुंदर पावन धाम के सदके,
आकारण कृपा करने वाले नाथ के सदके~~

यह दर तेरा बरकतों का भंडार है,
खाली झोली भरता यहा हर कोई बार बार है,
सब के मन की मुरादों को पूर्ण साईं करता आप है~~

ऐसा नज़ारा यही होता,
एक दूसरे के लिए मागें मिल कर सब दुआ,
निर्मल भक्ति के झरने में हर कोई गोते खाता,
गोते खाते-खाते अपनी व्यथा वो भूल जाता~~

हमकों अब ये प्यारा मंदिर शिरडी जैसा लगता,
इस द्वारकामाई में रोज़ एक फूल खिलता,
द्वारकामाई के इक इक भक्त हृदय में साईं नाथ खुद बसता~~

जय सांई राम~~~

http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/बाबा-की-यह-व्यथा-t21646.0.html;msg142600

January 18, 2008, 10:20:05 AM

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