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कैसी भक्ति होती थोथी

ओम साईं राम

कैसी भक्ति होती थोथी
इतराए जो पढ के पोथी

कौन सी भक्ति समझो उथली
नाम जाप करके जो उछली

कौन भक्ति को जाने संकर
मोह माया के जिसमें कंकर

किसका कम भक्ति का भाव
जिसमें श्रद्धा का हो अभाव

क्षण भंगुर है कैसी भक्ति
जिसमें सबूरी की ना शक्ति

कैसी भक्ति माने झूठी
मन चीता ना पा के रूठी

जय साईं राम

http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/हमारी-मांगें-पूरी-करो-t20105.0.html;msg138876

January 11, 2008, 08:08:13 AM

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