ओम साईं राम
खुदी से खुद हमने वादा किया है
जीवन ये सारा तुझे दे दिया है
बाबा की मूरत है दिल में बैठाई
करूणा के सागर से प्रीत लगाई
साईं समर्थ से जोडा है नाता
सदा संग रहना हमारे विधाता
जीवन की राहों में यूं चलते चलते
भटक जाते हम जो तुमसे ना मिलते
तुम्हींने जीने के काबिल बनाया
श्रद्धा सबूरी का पाठ पढाया
मालिक है एक ये नारा तुम्हारा
हमको भी लगता मधुर प्यारा प्यारा
धूनी से उपजा ये ऊदी प्रसाद
भक्तों को देता है खुशियां अगाध
हर तरफ है फैला तेरा नज़ारा
भक्तों का साईं हो तुम ही सहारा
जय साईं राम
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/हमारी-मांगें-पूरी-करो-t20105.45.html
January 13, 2008, 11:24:47 PM