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बाबा से दोस्ती का एक पवित्र रिश्ता है

जय सांई राम़।।।

बाबा से दोस्ती का एक पवित्र रिश्ता है
इस में न कोई छल-कपट,  न निंदा है
मुझे बाबा की दोस्ती पर है गर्व
दुनिया को यही बना सकती है स्वर्ग

बाबा की दोस्ती में नहीं कुछ ज्यादा न कम,
आईये खुलकर बांटे हम,  खुशियाँ और ग़म ,
बाबा जैसे दोस्तों के संग हम होते हैं हम
साथ रहेंगे वो जब तक दम में है दम

बाबा जैसे दोस्तों की जीवन मैं एहमियत होती है वो 
घोर अंधेरे मैं जो होती है लौ की
सब के दिल मैं होता है एक कोना
बाबा जैसे दोस्तों बगैर जो रह जाए सूना

बाबा की दोस्ती मैं नही होती कोई दीवार
न उम्र न मज़हब की दरार
दिल यही चाहता है बार-बार
हर जनम मैं रहे संग बनके दोस्त जैसे मेरे बाबा मेरे यार...

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई
ॐ सांई राम।।।

http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/बाबा-की-यह-व्यथा-t21646.0.html;msg142746

January 18, 2008, 10:21:06 AM

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