मकसदों की आग तेज हो
मनोबल की हवाएँ हो
तो वो आग बुझती नहीं है
मंजिल पा कर ही दम लेती है...
आँधियाँ तो नन्हें दीपक से हार जाती हैं
सच है,
क्षमताओं को बढाने के लिए
आँधी तूफ़ान का होना ज़रूरी होता है...
प्रतिभाएं तभी स्वरूप लेती हैं
जब वक़्त की ललकार होती है....
जो ज़मीन बंज़र दिखाई देती हैं
उससे उदासीन मत हो....
ज़रा नमी तो दो
फिर देखो वह क्या देती है
हाथ, दिल, मस्तिष्क, दृष्टि लिए
बाबा तुम्हारे संग हैं
सपनो की बारीकियां देखो
फिर हकीकत बनाओ....
तुम्हारे ऊपर है!
हाथ को खाली देखते हो
या सामर्थ्यापूर्ण!
मन अशांत हो
तो घबराओ मत
याद रखो,
समुद्र मंथन के बाद ही
अमृत निकलता है....
अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई
ॐ सांई राम।।।
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/बाबा-की-यह-व्यथा-t21646.0.html;msg142093
January 17, 2008, 05:26:20 AM