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मेरी ज़िंदगी की जो भी सुबह शाम होती है

ओम साईं राम

मेरी ज़िंदगी की जो भी सुबह शाम होती है
वो मेरे देवा तेरे ही नाम होती है
तेरा ही नाम ले ले कर सूरज उगता है
तेरा ही नाम ले कर ढल जाता है
मेरी इस ज़िंदगी का हर काम
तेरा नाम ले कर ही चल जाता है

तेरे ही नाम से प्रीत लगाई है
तेरे ही नाम की लौ जगाई है
तेरी ही शान में सजदे करती हूं
तेरे ही नाम का दम भरती हूं
तेरा नाम ही मेरे वजूद की पहचान है
इसीलिए तो साईंसेविका मेरा नाम है

जय साईं राम

http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/बाबा-की-यह-व्यथा-t21646.0.html;msg139705

January 11, 2008, 07:49:28 AM

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