ओम साईं राम
मैं नदिया तुम एक समंदर
तुममें जो मिल जाऊं मैं
चिर विश्रांति पाऊं मैं
मै याचक तुम राज धिराज
तेरे द्वारे आऊं मैं
साईं नाम धन पाऊं मैं
मैं मलयुत तुम निर्मल नीर
दया दृष्टि जो पाऊं मैं
उज्जवल स्वच्छ हो जाऊं मैं
जय साईं राम
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/बाबा-की-यह-व्यथा-t21646.0.html;msg140553;topicseen#msg140553
January 11, 2008, 08:27:11 AM