ॐ साईं राम~~~
हे परम कृपालु,हे दयामयी,
हे क्षमामयी,हे करूणामयी,
हे ममतामयी,हे मेरे साईं,
सागर से भी गहरे है आप,
धरती सम बङे है आप,
कितना विशाल ह्रदय आप का,
जो आप ने थामी मेरी बाह,
अब मैं क्या चाहूँ इसके सिवा,
सब कुछ दिया आपने,
ना रूकने दिया ,न थमने दिया,
बस अपने द्वार पर मस्तक रखने दिया,
अब मैं और नहीं कुछ चाहती
बस अपनी शरणी लगा लीजिए~~~
जय साईं राम~~~
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/हमारी-मांगें-पूरी-करो-t20105.0.html;msg142614
January 18, 2008, 10:23:46 AM