हर सांस में हर बोल में साईं नाम की झंकार है .
हर नर मुझे भगवान है हर द्वार मंदिर द्वार है ..
ये तन रतन जैसा नहीं मन पाप का भण्डार है .
पंछी बसेरे सा लगे मुझको सकल संसार है ..
हर डाल में हर पात में जिस नाम की झंकार है .
उस साईंनाथ के द्वारे तू जा होगा वहीं निस्तार है ..
अपने पराये बन्धुओं का झूठ का व्यवहार है .
मनके यहां बिखरे हुये साईं ने पिरोया तार है ..
http://forum.spiritualindia.org/sai-baba-poems/हर-सांस-में-हर-बोल-में-t21876.0.html
January 11, 2008, 08:11:17 AM